नेपाल से लेकर तुर्की तक होती थी मानव अंगों की तस्करी

 नेपाल से लेकर तुर्की तक होती थी मानव अंगों की तस्करी

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल वाट्सअप ग्रुप चैट से कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस का दावा है कि नेपाल में कम दामों में तय करके डोनर दिल्ली बुलाए जाते थे। किडनी रैकेट से जुड़े लोगों की पहली पसंद नेपाल था। क्योंकि, यहां से आने जाने के लिए न तो वीजा की जरुरत है और न ही पासपोर्ट की। कानपुर एसएसपी अनंत देव ने बताया कि नेपाल के अलावा तुर्की और श्रीलंका का नाम भी सामने आया है। इन देशों को लेकर जानकारियां जुटाई जा रही हैं। वहां पर भी ऐसे लोग सक्रिय हैं जो डोनर को दिल्ली लाकर किडनी ट्रांसप्लांट करने का काम करते थे। पुलिस ने बताया कि बिचौलियों की मदद से पीएसआरआई में गरीब लोग लाए जाते थे और फिर फर्जी पैथालॉजिकल रिपोर्ट तैयार कर डोनेशन के कागज बनाए जाते थे।शनिवार को कानपुर पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पीएसआरआई में अवैध ढंग से किडनी प्रत्यारोपण के सबूत मिले हैं। शुक्रवार को हिरासत में लेने के बाद पुलिस अस्पताल के सीईओ दीपक शुक्ला को जांच के सिलसिले में कानपुर लाई थी। पूछताछ के दौरान शुक्ला ने मानव अंगों की खरीदफरोख्त की बात कबूली। इस इंटरनेशनल किडनी रैकेट का खुलासा फरवरी में हुआ था। गिरोह के सरगना गौरव मिश्रा समेत अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी हैपुलिस के मुताबिक, किडनी-लिवर ट्रांसप्लांट में सबसे बड़ा खेल डीएनए सैंपल बदलने और फर्जी दस्तावेज को तैयार करने में होता था। इसी के जरिए डोनर (किडनी देने वाला) और रिसीवर (किडनी लेने वाला) रिश्तेदार दिखाए जाते थे। ये पूरा हेरफेर हॉस्पिटल के कोऑर्डिनेटर, डोनर प्रोवाइडर के साथ मिलकर करते थे। इसकी पूरी जानकारी डॉक्टर दीपक शुक्ला को रहती थी। पीएसआरआई के लैब इंचार्ज सहित अन्य डॉक्टर भी इसमें संलिप्त हैं।मामलेे में पीएसआरआई की कोऑर्डिनेटर सुनीता प्रभाकरण और मिथुन भी आरोपी हैं। दोनों आरोपियों ने हाईकोर्ट से स्टे ले रखा है। इसलिए उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई। पुलिस अब उनको पूछताछ के लिए नोटिस भेजेगी।